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गुप्त नवरात्र: माँ काली के 108 नाम और शाबर मन्त्र का जाप करने से मिलेगी हर काम में सफलता

 

हर साल माघ महीने में गुप्त नवरात्र का पर्व मनाया जाता है। ऐसे में इस साल यह पर्व 2 फरवरी से आरम्भ हो रहा है। ऐसे में गुप्त नवरात्रि के पहले दिन माँ काली का पूजन किया जाता है। तो आइए जानते हैं माँ काली के 108 नाम। इन नामों का गुप्त नवरात्रि के पहले दिन जाप करने से सभी काम बन जाते हैं और हर मनोकामना पूरी होती है।

 

माँ काली के 108 नाम-

1 काली

2 कापालिनी

3 कान्ता

4 कामदा

5 कामसुंदरी

6 कालरात्री

7 कालिका

8 कालभैरवपूजिता

9 कुरुकुल्ला

10 कामिनी

11 कमनीयस्वभाविनी

12 कुलीना

13 कुलकर्त्री

14 कुलवर्त्मप्रकाशिनी

15 कस्तूरीरसनीला

16 काम्या

17 कामस्वरूपिणी

18 ककारवर्णनीलया

19 कामधेनु

20 करालिका

21 कुलकान्ता

22 करालास्या

23 कामार्त्ता

24 कलावती

25 कृशोदरी

26 कामाख्या

27 कौमारी

28 कुलपालिनी

29 कुलजा

30 कुलकन्या

31 कलहा

32 कुलपूजिता

33 कामेश्वरी

34 कामकान्ता

35 कुब्जेश्वरगामिनी

36 कामदात्री

37 कामहर्त्री

38 कृष्णा

39 कपर्दिनी

40 कुमुदा

41 कृष्णदेहा

42 कालिन्दी

43 कुलपूजिता

44 काश्यपि

45 कृष्णमाला

46 कुलिशांगी

47 कला

48 क्रींरूपा

49 कुलगम्या

50 कमला

51 कृष्णपूजिता

52 कृशांगी

53 कन्नरी

54 कर्त्री

55 कलकण्ठी

56 कार्तिकी

57 काम्बुकण्ठी

58 कौलिनी

59 कुमुदा

60 कामजीविनी

61 कुलस्त्री

62 कार्तिकी

63 कृत्या

64 कीर्ति

65 कुलपालिका

66 कामदेवकला

67 कल्पलता

68 कामांगबद्धिनी

69 कुन्ती

70 कुमुदप्रिया

71 कदम्बकुसुमोत्सुका

72 कादम्बिनी

73 कमलिनी

74 कृष्णानंदप्रदायिनी

75 कुमारिपूजनरता

76 कुमारीगणशोभिता

77 कुमारीरंश्चरता

78 कुमारीव्रतधारिणी

79 कंकाली

80 कमनीया

81 कामशास्त्रविशारदा

82 कपालखड्वांगधरा

83 कालभैरवरूपिणि

84 कोटरी

85 कोटराक्षी

86 काशी

87 कैलाशवासिनी

88 कात्यायिनी

89 कार्यकरी

90 काव्यशास्त्रप्रमोदिनी

91 कामामर्षणरूपा

92 कामपीठनिवासिनी

93 कंकिनी

94 काकिनी

95 क्रिडा

96 कुत्सिता

97 कलहप्रिया

98 कुण्डगोलोद्-भवाप्राणा

99 कौशिकी

100 कीर्तीवर्धिनी

101 कुम्भस्तिनी

102 कटाक्षा

103 काव्या

104 कोकनदप्रिया

105 कान्तारवासिनी

106 कान्ति

107 कठिना

108 कृष्णवल्लभा

माँ काली शाबर मन्त्र-

ॐ काली घाटे काली माँ

पतित पावनी काली माँ

जवा फूले

स्थुरी जले

सेई जवा फूल में सीआ बेड़ाए

देवीर अनुर्बले

एहि होत करिवजा होइवे

ताही काली धर्मेर

वले काहार आज्ञे राठे

काली का चंडीर आसे।

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